7 Jul 2017

li-Fi क्या है कैसे काम करता है इसके फायदे नुकसान क्या है

आज हम आपको एक और ऐसी टेक्नोलॉजी से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसके बारे में आपने नहीं सुना होगा तो आज हम बात करेंगे LI-FI के बारे में यह कैसी टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल अभी तक होना ज्यादा शुरू नहीं हुआ है. लेकिन यह वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम है जिससे आप कोई भी डाटा बहुत जल्दी कही पर भी ट्रान्सफर कर सकते हैं.  आजकल वाईफाई का इस्तेमाल किया जाता है जो कि रेडियो वेव पर आधारित टेक्नोलॉजी है और जो LI-FI है वह लाइट पर आधारित टेक्नोलॉजी है.


LI-FI क्या है


LI-FI का पूरा नाम light fidelity है, जिसका मतलब है कि इसमें एक Visible लाइट कम्युनिकेशन से कोई भी डेटा ट्रांसफर किया जाता है और इसकी स्पीड बहुत ज्यादा होती है जो कि वाईफाई के मुकाबले बहुत ज्यादा है. इससे आप 224 गीगाबिट डाटा एक सेकंड में भेज सकते है. इस Term का इस्तेमाल 2011 में किया गया था और इसमें कुछ ऐसे लाइट बल्ब इस्तेमाल किए जाते हैं जो कि वायरलेस राउटर की तरह काम करते हैं.

उसके बाद में 2012 में इस पर रिसर्च करनी शुरू कर दी थी और लगभग 4 साल बाद में मतलब 2016 में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना शुरू किया गया था.

LI-FI कैसे काम करती है

LI-FI और वाईफाई दोनों डाटा ट्रान्सफर करने के लिए काम में आती है जो कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल पर काम करती है. वाईफाई में रेडियो वेब का इस्तेमाल किया जाता है और LI-FI में विजिबल लाइट का इस्तेमाल करके डाटा को ट्रांसफर किया जाता है. जैसा की हमने आपको बताया कि LI-FI एक  विज़िबल लाइट कम्युनिकेशन सिस्टम है.  इसका मतलब है कि कोई भी डेटा को ट्रांसफर करने और रिसीव करने के लिए फोटो डिटेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है जो कि डाटा को दोबारा उसी फॉर्म में कन्वर्ट करके हमें हमारे कंप्यूटर का हमारे डिवाइस पर Read करता है.


जो हमारा LED बल्ब होता है वह एक ऐसा सेमीकंडक्टर है जो कि हमें लाइट सप्लाई करता है जब हम उसको कम इलेक्ट्रिसिटी  देते हैं तो उसकी रोशनी भी कम हो जाती है और जब हम उसको ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी देते हैं तो उसकी रोशनी ज्यादा हो जाती है और इसी तरीके से यह विजिबल लाइट कम्युनिकेशन सिस्टम काम करता है.
उदाहरण के तौर पर मान लो आपने कोई डाटा LED बल्ब पर भेजा है और आपके सामने एक फोटो डिटेक्टर लगा हुआ है जिससे आपका डेटा को दोबारा कन्वर्ट करके आपके राउटर पर भेज दिया जाता है ताकि आपका सिग्नल सभी जगह पर फैला सके तो उस दौरान जितने भी LED बल्ब में बदलाव होते हैं वह सभी फोटो डिटेक्टर के दवारा कैलकुलेट किए जाते हैं और उसके बाद में उस तरह का डाटा स्पीड दी जाती है और इसी तरीके से LI-FI सिस्टम काम करता है.
2012 में इस पर रिसर्च करनी शुरू कर दी थी और लगभग 4 साल बाद में मतलब 2016 में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना शुरू किया गया था.

LI-Fi का फ्यूचर

जैसा कि हमने आपको पहले बताया LI-FI को नवंबर 2012 से इसके ऊपर काम करना शुरू कर दिया था और नवंबर 2014 में pioneers ने अपना pioneers pureLiFi से French lighting company को ज्वाइन किया था. अभी भी pioneers pureLiFi के दो प्रोडक्ट मार्केट में है जिसमें Li-Flame Ceiling Unit है जो कि एक LED लाइट सिस्टम के साथ कनेक्ट हुई हुई है और Li-Flame Desktop Unit जो की USB के द्वारा कनेक्ट होकर एक डिवाइस से कनेक्ट हो जाता है जिससे आप कोई भी डाटा आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं. जैसे जैसे इस टेक्नोलॉजी में नए बदलाव आते जाएंगे वैसे वैसे ही इसका इस्तेमाल होना शुरू हो जाएगा. यह बहुत ही बढ़िया टेक्नोलॉजी है इसमें आपका सिग्नल स्ट्रेंथ कम नहीं होगी और आप आसानी से हाइट हाटा स्पीड वाला इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे.

LI-Fi के फायदे

  • इससे आप हाई स्पीड से डाटा ट्रान्सफर कर सकते है.
  • इससे आपको Proper सिंग्नल की Strength मिलेगी.
  • इसके इस्तेमाल के लिए आपको लाइट बल्ब की जरूरत पफ्ती है.

LI-Fi के नुकसान

  • यह खर्चीला साधन है.
  • इसके इस्तेमाल के लिए आपको हर टाइम LED बल्ब ON रखने पड़ेंगे.
  • पॉवर बहुत ज्यादा लेते है.
तो यह है LI-FI और यह कैसे काम करती है इसके फायदे और नुकसान.

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