20 Nov 2017

शराब से जुडी ये जानकारी आप बिल्कुल नहीं जानते होंगे ! तेरी यादों का हैंगओवर !!

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तेरी यादों का हैंगओवर !!
पीने के बाद खुमारी यानी की हैंगओवर होना लाजमी है। वीकएंड हो या दोस्‍तों के साथ जश्‍न का माहौल, ड्रिंक पार्टी तो ही जाती है। ऐसे में कई बार अल्‍कोहल का ज्‍यादा सेवन करने पर हैंगओवर की स्थिति आ जाती है। हैंगओवर होने पर आपको अजीब सा महसूस होता है। रह रह एक ही ख्याल बार बार आता है क़ि अब मैं दुबारा कभी नहीं पिऊँगा/पिऊँगी"। अक्सर शराब पीने के बाद जब सुबह नींद खुलती है तो सिर में तेज दर्द और पेट में भयंकर मरोड़ भी उठता है। चलिए थोड़ा विश्लेषण करके देखते है। क्या है ये बला? क्यूँ होता है हैंगओवर। दो घूँट अन्दर गयी नहीं की आवाज बदल गयी। ऐसा क्या हुआ? 80 के दशक में एक फिल्म आई थी "शराबी"। जबरदस्त फिल्म। और उतनी ही ज़बरदस्त एक्टिंग। गाना था 'नशा शराब में होता तो नाचती बोतल'। हकीकत भी यही है। शराब में कोई नशा नहीं होता है।
अब आप सोच रहे होंगें। मैं ये क्यों बोल रहा हूँ। जी मैं पूरे होशो हवास में बता रहा हूँ। एथिल अल्कोहल जिसे हम शराब बोलते है। काफी बिगडैल किस्म के जनाब है। अब बिगड़ते कैसे है ये भी जान लीजिये। जैसे ही ये ज़नाब आपके के गले को तर करते हुए पेट में पहुँचे। वैसे ही इनको एक और जनाब मिल गए। नाम है अल्कोहल डी-हाइड्रोजिनेज़। फिर क्या जुगलबंदी चालू। एक से भले दो। जनाब पूरा चोला बदल लेते है। रंग, ढंग, चाल, ढाल सब बदल जाती है। जनाब पर मित्र का इतना असर होता है क़ि अपना नाम बदल कर एसिटलडीहाईड रख लेते है। खुमारी चढ़ने के पीछे इन्हीं का मुख्य योगदान है। बाकि कुछ लोग और भी आयेंगें अभी। जैसे ही नाम बदला तुरंत लपक कर एक जनाब आ गए। फिर क्या अब इनसे भी दोस्ती गाँठ ली। नाम है एल्डिहाइड डी- हाइड्रोजिनेज़। वैसे एक बात बताऊँ। नशेंडिओं की दोस्ती ज्यादा दिन तक चलती नहीं है। अब इन के साथ उठना बैठना चालू। फिर से वही हरक़त। फिर नाम बदल लिया। अब रख लिया एसिटिक एसिड। एक और बात बता दूँ यहाँ। ये एथिल अल्कोहल पहले कभी ग्लूकोस हुआ करते थे। जब ये ग्लूकोस थे उस समय इनके मित्र थे जाईमेज़। इनसे मिलने के बाद नाम बदला तो एथिल अल्कोहल हो गए। खैर, इनको जितने भी मित्र मिले सब ने इनको अन्दर से तोड़ते गए। अब एसिटिक एसिड जनाब अपने अंतिम यात्रा के पड़ाव के पर है। और अपने अंतिम मित्र, को-एंजाइम से मिलकर एशिटल-को-एंजाइम बन जाते है। और अंततः कार्बन डाईऑक्साइड और पानी में बदल जाते है। यह पूरी प्रक्रिया पेट से लेकर यकृत तक चलती है। इस दौरान ये दिल से दिमाग तक सबको हिलाकर कर रख देते है। 10 से 15 मिली हर घंटे की दर से इनका बिगड़ना चालू रहता है। सबसे पहले वाले मित्र से बिगड़ने की दर, दुसरे की तुलना से ज्यादा रहती है। इसी वजह से रक्त में उपस्थित पानी में आसानी से घुलने की वजह से एल्डिहाइड की सान्द्रता अधिक बढ जाती है। और रक्त जहाँ जहाँ गया वहाँ वहाँ उनके साथ साए की तरह ये भी पहुँच गए। जिसका असर शरीर के अन्दर मौजूद सारे अंगों पर पड़ता है। खुद तो बिगड़े ही थे साथ में पूरे समाज को भी गन्दा कर देते है। सबसे तेजी से अल्कोहल का अवशोषण आँतों द्वारा होता है। इसलिए यही हियायद दी जाती है क़ि ख़ाली पेट इसका सेवन न करें। सोडा वाटर भी इसकी अवशोषण की दर को बढा देता है। पेट भरे होने की स्थिति में या आपने अधिक वसा वाली डाइट ले रखी है तो इसके अवशोषण की दर कम हो जाती है। स्मोकिंग से भी इसके अवशोषण की दर कम हो जाती है।
अब जैसे जैसे रक्त में इनकी मात्रा यानी ब्लड अल्कोहल सान्द्रता बढती जायगी वैसे वैसे इनकी हरकतें भी बदलती जाएँगी। अलग-अलग BAC पर अलग अलग लक्षण। जिससे अभद्र् भाषा, फूहड़ता, असजगता जैसी विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं। 0.45 अल्कोहल युक्त रक्त यानी ब्लड अल्कोहल सांद्रता (LD50) को प्रस्तुत करता है। जो बहुत ही घातक हो सकता है। आदमी की तुलना में औरतों के रक्त में इसकी सांद्रता बहुत तेजी से बढती है। ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क़ि औरतों में मसल्स कम और फैट ज्यादा होती है। मसल्स में सबसे ज्यादा पानी उपस्थित के कारण वहां पर अवशोषित हो जाता है। यही वजह है क़ि मसल्स कम होने के कारण रक्त में अल्कोहल की सान्द्रता तेजी से बढती है। और जल्दी से अपना प्रभाव दिखाती हैं। अल्कोहल विषाक्तता मस्तिष्क के साथ साथ इंसुलिन के उत्पादन को उत्तेजित करता है, जिससे ग्लूकोज चयापचय को बढ़ जाता है और रक्त शर्करा में कमी हो जाती है। इसके अलावा, अल्कोहल हाइपोथालमस से वासोप्रेसिन के निर्माण को सीमित कर देता है और पिट्यूटरी ग्रंथि से हार्मोन स्राव को भी कम कर देता है। अल्कोहल मूत्रवर्धक (diuretic) होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर से तरल पदार्थों को निकाल देता है। परिणामस्वरूप होने वाली पानी की कमी या निर्जलीकरण (dehydration) हो जाता है। जो हैंगओवर का एक और कारण है। एल्डिहाइड की सान्द्रता हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र में उपस्थित साइटोकाइन को सीधे तौर पर प्रभावित करते है। IL-10, IL-12 और IFN-gamma, ये सबसे ज्यादा प्रभावित होते है। और हैंग ओवर का कारण बनते है। हैंगओवर का कोई पक्का और ठोस इलाज नहीं हैं। अगर हैंगओवर से छुटकारा पाना चाहते हैं तो खूब सारा इलेक्ट्रोलाइट मिला हुआ पानी पिएँ। ताकि अल्कोहल के सेवन के कारण हुई पानी की कमी (dehydration) को पूरा किया जा सके। पानी की पुनः आपूर्ति (re-hydrate) बहाल कीजिये। यही सबसे सीधा और सरल उपाय है।
साभार: संजीव कुमार सिंह
रिसर्चर (क्लिनिकल/सोशल)


1 comment:


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