16 Dec 2017

हर काला कैमरा DSLR नही होता है और हर अच्छी तस्वीर के पीछे भी DSLR नहीं होता है।

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हर काला कैमरा DSLR नही होता है और हर अच्छी तस्वीर के पीछे भी DSLR नहीं होता है। फोटोग्राफी DSLR से नहीं बनी है, DSLR फोटोग्राफी से आया है। यह एक टेक्नोलॉजी है जो थोड़ा सा कन्फ्यूज करती अपने नाम से और काम से। DSLR का पूरा नाम है Digital Single Lens Reflex तो सही मायनों में एक DSLR कैमरा ठीक साधारण डिजिटल कैमरा जैसा ही है लेकिन कहीं बढ़कर है।
DSLR को समझने से पहले एक नजर पुराने कैमरों पर डालते हैं। रील वाले कैमरे याद होंगे आपको । वो कैमरे पूरी तरह से प्रकाशीय यंत्र थे केवल शटर सिस्टम और फ्लैश ही इलैक्ट्रोनिक हुआ करता था। कुछ धूप वाले कैमरे में तो सब कुछ मैकेनिकल ही होता था। वहां तस्वीर फोटोग्राफी फिल्म पर ली जाती थी। लेकिन अब जो कैमरे है वो सब डिजिटल है चाहे स्मार्टफोन कैमरा हो , पांइट एंड शूट, मिररलेस या फिर सबका चहेता DSLR।
वर्तमान में कैमरे तीन मुख्य प्रकार के प्रयोग में आते हैं।
1 डिजिटल/काम्पैक्ट/ पांइट एंड शूट कैमरा
2 मिररलेस / ब्रिज कैमरा
3 DSLR कैमरा
ये तीनों प्रकार के कैमरे डिजिटल या इलैक्ट्रोनिक आधार पर एक ही तरह से काम करते हैं (मंहगे और सस्ते कैमरों की गुणवत्ता और फीचर्स का फर्क आता है) लेकिन तीनों में प्रकाशिकी (Optics) में बहुत अंतर होता है।
सबसे पहले बात करे अगर पांइट एंड शूट कैमरा की तो ये बड़े साधारण कैमरे होते हैं‌। स्मार्टफोन के कैमरे भी अब इनसे अच्छी क्वालिटी के आने लगे हैं। इनका आकार छोटा होता है और इनकी आॅप्टिक्स बेहद साधारण होती है। इनमें फिक्स लेंस होते हैं जो सीमित मूवमेंट कर सकते हैं और कुछ हद तक जूम भी। इन कैमरों में अधिक फीचर्स नही होते हैं पर कैजुअल फोटोग्राफी के लिए अच्छे होते हैं।
लेकिन इन कैमरों की पोर्टेबिलिटी की वजह कुछ कैमरा मेन्युफेक्चर्स ने इनकी सीमा और कार्य क्षमता को बढ़ा दिया है और इस श्रेणी के कैमरों की गुणवत्ता को बढाया है। Nikon Coolpix P900(30,000 INR), Canon G1X Mark III (78,000 INR) , Sony RX1 RII (2,50,000 INR) इस श्रेणी के कुछ जबरदस्त कैमरे है, जो किसी एंट्री लेवल के DSLRs को पछाड़ सकते हैं।  स्मार्टफोन कैमरे भी इन्हीं कैमरों के उदाहरण है।
इसके बाद बात करे DSLR कैमरा की तो इनकी काबिलियत का राज इनकी प्रकाशिकी में छिपा है। किसी कैमरे की दो महत्वपूर्ण इन्द्रियाँ होती है उसका लेंस और इमेज सेंसर। अब इमेज सेंसर तो डिजिटल हो गया है तो बात आती है लेंस की । DSLR कैमरा में जो लेंस बदलने की सुविधा उपलब्ध है वही उसे इतना जानदार बनाती है और दूसरी चीज जो होती है वो है उसका Viewfinder (कैमरे के ऊपरी भाग में लगा छोटा लेंस जिससे तस्वीर लेने से पहले देखी जाती है।)
DSLR कैमरा के अंदर एक दर्पण और एक प्रिज्म (Pentaprism) होता है जो लेंस से आने वाले प्रकाश का एक भाग Viewfinder को भेजता है जिससे आप ली जाने वाली तस्वीर का बिल्कुल सही प्रतिरूप देख सकते हैं और इसी टेक्नोलॉजी की वजह से इसका नाम DSLR पड़ा है। किसी और कैमरे में यह सुविधा नहीं होती है। चूंकि DSLR कैमरा अलग अलग लेंस पर काम कर सकते हैं तो इनकी कार्य क्षमता बहुत बढ़ जाती है और इनके चाहने वाले भी।
इसके बाद एक और कैमरे रहते हैं मिररलेस कैमरा ये बिल्कुल DSLR जैसे ही होते हैं पर इनमें वो मिरर ( दर्पण) नही होता है जो लेंस से आने वाले प्रकाश को Viewfinder तक भेजता है। इनका Viewfinder डिजिटल या अलग लेंस वाला होता है। इसीलिए इन्हें मिररलेस कहा जाता है। इनका आकार छोटा होता है परन्तु लेंस बदलने की सुविधा उपलब्ध होती है। Sony a9 (alpha 9) (3,30,000 INR) और Canon EOS M series के कैमरे इस श्रेणी में आते हैं।
लेखक : भारत मित्तल( Bharat Mittal)

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