13 Mar 2018

फोन में लगने वाले हाई सिक्योरिटी पासवर्ड कितने प्रकार के हैं। जाने कैसे काम करते है ?

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अपने स्मार्टफोन को आपने किस के भरोसे छोड़ रखा है, सिर्फ पासवर्ड के भरोसे?  ऐसे में आपका फोन सुरक्षित नहीं है ! कहीं और सुरक्षा कवच भी है:-


कई सालों से फ़ोन  की सुरक्षा केवल पासवर्ड पर ही निर्भर थी, लेकिन दिनोंदिन बदलती तकनीक के चलते अब कठिन से कठिन पासवर्ड भी आसानी से हैक हो  जाते हैं ! इसलिए स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने पारंपरिक पासवर्ड को बायोमेट्रिक पासवर्ड में तब्दील कर दिया है ! जैसे  फिंगरप्रिंट स्कैनर , फेशियल रिकाग्निसन,  आइरिस स्कैनर, वॉइस रिकग्निशन आदि । इसके अलावा फोन पर लोन बायोमेट्रिक मशीन और पासवर्ड आते हैं । यदि आपने फोन में इन सिक्योरिटी फीचर्स को इनेबल कर रखा है , तो आप की इजाजत के बिना आपके फोन का इस्तेमाल कोई भी नहीं कर सकता है।

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वॉइस रेकॉग्निसन:- वॉइस रिकग्निशन को स्पीच रिकग्निशन भी कहा जाता है । यह फीचर व्यक्ति द्वारा बोले गए शब्दों को इनपुट की तरह लेता है और उन शब्दों को डिजिटल फोन में बदलकर उसके ऊपर काम करता है यह फीचर इन शब्दों के जरिए ही व्यक्ति विशेष की पहचान करता है इस तकनीक का प्रयोग मोबाइल फोन चलाने कमांड देने और आवाज के माध्यम से सर्च करने के लिए किया जाता है इस में कीबोर्ड के बटन दबाने की जरूरत नहीं होती है । वॉइस रिकॉर्ड नेशन में आवाज को बहुत से  चरणों से गुजरना पड़ता है कुछ बोलने पर कंपन पैदा होता है जिसे एनालॉग सिग्नल करते हैं। इस एनालॉग देव को मोबाइल और कंप्यूटर सिस्टम में बदलने के लिए एबीसी ट्रांसलेटर का प्रयोग करते हैं । यह धोनी को छोटे-छोटे सैंपल में बांट देता है और ध्वनि को सामान्य के अंतर्गत आता है , क्योंकि हर व्यक्ति एक ही गति से नहीं बोल सकता है।


आइरिस स्कैनर:-  आयरिश पैटर्न और रेटिना ब्लड वेसल्स प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग और अनूठे होते हैं ! रेटिनल स्कैनिंग एक बायोमेट्रिक तकनीक है । जिससे रेटिना में मौजूद ब्लड वेसल्स का अनोखा पैटर्न होने की वजह से व्यक्ति को पहचाना जाता है ।ज्यादातर यूजर Iris पैटर्न और रीना ब्लड वेसल्स के मैदान में गड़बड़ आ जाते हैं । स्मार्टफोन में मौजूद फ्रंट कैमरे की मदद से यूजर अपने रेटीना को स्कैन करता है। जिसके बाद ही फोन अनलॉक होता है वर्तमान में फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैनर बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है । मौजूदा समय में एक Samsung अपने कुछ चुनिंदा फोंस में ही आइरिस स्कैनर का पिक्चर दे रही है , लेकिन देखा गया है कि यह फीचर हाई क्लास पहनकर स्मार्टफोन को अनलॉक करने में ठीक से काम नहीं कर पाता है।

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फिंगरप्रिंट स्केनर:-  स्मार्टफोन में फिंगरप्रिंट स्केनर होने से मोबाइल की सिक्योरिटी काफी हद तक बढ़ जाती है । जब मुझे अपनी इस विकल्प को ऑन करता है , तो स्मार्ट फोन में मौजूद ऑप्टिकल स्केनर यूजर के फिंगरप्रिंट्स की डिजिटल इमेज कैप्चर कर लेता है । यह डिजिटल इमेज आगे वेरिफिकेशन के लिए स्मार्ट फोन में फिट हो जाती है । यदि फोन में फिंगरप्रिंट सिक्योरिटी ऑन हेतु यूजर के अलावा कोई दूसरा फोन को अनलॉक नहीं कर सकता है । जब हम फोन को ओपन करने या अन्य किसी काम के लिए अनलॉक करते हैं तो यह हमारे फिंगरप्रिंट की इमेज लेकर पहले से सॉरी में से मिलान करता है । यदि इमेज मैच कर जाती है तो फोन अनलॉक हो जाता है यदि फिंगर प्रिंट नहीं होते हैं तो वह फोन पर ट्राई अगेन का संदेश आता है । हाल ही में स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ने अपने स्मार्टफोन का विकल्प दिया है,  इस तकनीक के लिए फोन में ओएलईडी डिस्प्ले दिया है।


फेशियल रिकग्निशन:-  इसकी मदद से यूजर स्मार्टफोन को देख कर ही अनलॉक कर सकता है । यह फीचर लोगों को पसंद भी आ रहा है । अगर आप सोशल मीडिया का यूज करते हैं , तो आपको पता होगा कि कैसे Facebook आपके दोस्तों के चेहरे के आधार पर फोटो सेट करने का ऑप्शन देता है ।वह भी एक तरह का फेशियल रिकग्निशन ही है , फेशियल रिकग्निशन सिस्टम एक मोबाइल फीचर है , जो किसी शख्स को डिजिटल इमेज के तौर पर वेरीफाई कर सकता है , और फेशियल टीचर डेटाबेस निफ्टी फ्यूचर की 3D तस्वीर के साथ यूजर के चेहरे कार्ड डिजिटली मिलान  कराता है । आम तौर पर इसे सिक्योरिटी सिस्टम में यूज किया जाता है , यदि स्मार्टफोन में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम किसी शख्स की पहचान गलत फिट कर ले तो काफी दिक्कत आ सकती है ।हाल ही में इस तकनीक को एप्पल ने iPhone X में फेस ID के नाम से दिया है । इसको ज्यादा सिक्योर बनाने के लिए फ्रंट कैमरे को कई सारे सेंसर के साथ जोड़ा गया है iPhone का दावा है कि फेस ID यूजर के चेहरे के करीब 30000 पॉइंट को अध्ययन करता है। जिससे समय के साथ चेहरे पर होने वाले बदलाव के बाद भी आपको पहचान सकेगा इसके अलावा सैमसंग ने अपने स्मार्टफोन गैलेक्सी एस8 और एस8 प्लस में फेशियल रिकग्निशन का फीचर दिया है ।यह फीचर पहले Android फोंस में आ चुका है, लेकिन ज्यादा सिक्योर ना होने की वजह से इसे बंद कर दिया गया था। Android में यह फीचर ज्यादा सिक्योर नहीं है क्योंकि Android में यूजर के फेस को टू डायमेंशनल कैमरा से स्कैन किया जाता है वही iPhone x का फेस ID यूज़र के चेहरे को 3D स्कैन करता है iPhone X के फेस ID में अपना चेहरा रजिस्टर करते समय iPhone आपको अपना चेहरा घुमाने के लिए गाइड करता है। ताकि वह आपके चेहरे को 3D स्कैन कर सके।
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